ज़िंदगी ना मिलेगी दोबारा

सनडे का दिन था बेल बजी तो देखा रवि था मेरा मित्र
कई बार मुझसे कोई ना कोई मदद माँगने आ चुका था
उसके चेहरे से लगता था की वो कुछ परेशान है मैने सोचा
अगर पूछ लिया तो तो फिर कुछ ना कुछ मदद के लिए देना पड़ जाएगा

इधर उधर की बातों में आधा घंटा बीत चुका तो रवि बोला मैं चलता हूँ
मैने भी कहा अच्छा ठीक है मैने भी सोचा चलो आज बच गये
सुबह आफिस पहुँचा तो पता चला की रवि नहीं आया उसकी पत्नी रात से
हॉस्पिटल में अड्मिट थी

शाम को घर पहुँचा तो पता चला की अभी अभी उसकी पत्नी का
देहांत हो गया है सुबह संस्कार है मैं उसी समय हॉस्पिटल पहुँचा वो एक सरकारी हॉस्पिटल था
वहाँ पता चला की आर्थिक तंगी की वजह से वे प्राइवेट हॉस्पिटल में नहीं ले जा पाए
सरकारी अस्पतालों का हाल किसी से छुपा नहीं हैं

मैं समझ गया की कल रवि मेरे घर
क्यों आया था ओर मदद माँगने में संकोच कर रहा था .अब मुझे अपने आप पर लज्जा
आ रही थी की अगर मैं कुछ मदद कर देता तो शायद वो सही इलाज़ करवा पाता ओर
शायद वो जिंदा होती…

अगर मैं आपकी बेटी होती तो !

सदर बाज़ार जाने के लिए रिक्शा किया पहाड़ गंज से

अचानक नज़र पड़ी कि एक लड़की को बड़ी बेरहमी से दो लड़के चाकू मार मार कर अधमरा कर रहे हैं डर के मारे किसी की हिम्मत नहीं हो रही थी उसे रोकने की

दोनों लड़के चाकू लहराते बाइक पर भाग निकले सब तमाशा देखने लगे पता चला की दोनो लड़के लड़की का मोबाइल छीनकर भाग रहे थे तो लड़की ने विरोध किया तो उसका ये हाल कर गये

भीड़ बहुत हो गयी थी जाम ना लग जाए रिक्शा वाला भी तेज़ी से सदर की तरफ चल पड़ा.
आते हुए पता चला की पुलिस के आने से पहले ही लड़की ने दम तोड़ दिया था .

Accident, Bleed, Bleeding

इतना सुनते ही मुझे ना जाने क्या हो गया मेरी आँखों के सामने वो नज़ारा घूम गया , मुझे ऐसा लगा की वो लड़की मुझसे पूछ रही हो कि मेरी जगह आपकी बेटी होती तो भी क्या आप ऐसे ही निकल जाते इस बात को दो साल गुजर चुके हैं लेकिन इस सवाल का जवाब मुझसे बार बार पूछा जा रहा है ….ये तो मैं तय कर चुका हूँ की अब मैं ऐसे ही निकला नहीं करूँगा…