बेशर्म ?

शोरूम में आये हुए ३० मिनट से ज्यादा हो चुके थे …
लेकिन कुछ पसंद का नहीं मिल रहा था…या ” अनीता ” को ही नहीं पता था की क्या लेना है ….
काफी नजरें इधर उधर मारने के बाद डमी पर डाला हुआ एक पीस अच्छा लगा मैं उसको हाथ लगाकर निहारने लगी …

अचानक से मुझे फील हुआ कि किसी ने मुझे छुआ है मैंने पीछे देखा तो एक युवक था तकरीबन ३० साल का ….
एक तो कुछ पसंद न आने कि झल्लाहट और दूसरा एक अनजान के द्वारा छूना…
मैंने तेजी से घुमते हुए उसके गाल पर चांटा रसीद कर दिया …हाथ इतनी तेजी से पड़ा कि वो गिर पड़ा..
भीड़ इकट्ठी हो चुकी थी और मैं चिल्लाये जा रही थी …कभी उस व्यक्ति को और कभी शोरूम वालों को ….

उस भीड़ में से एक युवती उस युवक को हाथ पकड़ कर उठा रही थी …मैं उसपर भी चिल्लाने लगी …..
उस युवती ने अपने पर्स में से एक स्टिक निकाली और उसे खोलकर उस व्यक्ति के हाथों में पकड़ा दी ….
मुझसे शमा मांगने लगी कि गलती मेरी है ….इनको दिखाई नहीं देता मैंने ही इन्हें इस डमी के पास खड़ा किया था ….
मेरा मज़ाक न बने इसलिए मैंने शो नहीं होने दिया कि इनको दिखाई नहीं देता…मुझे माफ़ कर दीजिये ….

मेरा सारा गुस्सा उड़ चूका था …मुँह से कुछ बोला नहीं जा रहा था..
बेशर्म वो था या में थी …..

पहचान

 

लिखते लिखते अचानक से ज़िन्दगी के पन्ने पलटते गए…
क्या मैंने कभी सोचा था आज अपनी किताब छपने की बात …..
कैसे कोई एक छोटी सी कंपनी में कलम घिसने वाला सोच सकता है…

ज़िन्दगी ने जो ख़ुशी और गम दिए उसे ही समेटकर लिखना शुरू कर दिया …..
पता नहीं कब इसने एक जूनून की शक्ल इख़्तियार कर ली ….
खाना न खाया हो चल जाता था …..
दोस्तों से बात न हुई हो चल जाता था …..
लेकिन कम्बख्त नींद न आती थी जब तक १०-१२ पन्ने भर न दूँ …..

देखते ही देखते मेरे चारों तरफ भरे हुए पन्नों का अम्बार लगना शुरू हो गया …..
भला हो इस इंटरनेट का जिसने उस अम्बार को अपने में समेत लिया ….
१०-१२ लोगों ने पसंद आने पर छापने के झूठे सच्चे वादे किये….

लेकिन में छापने के लिए कभी लिखता था ऐसा नहीं लगता …
लेकिन आज एक अजीब सी ख़ुशी जरूर महसूस हो रही है …
कि आज मेरी किताब मेरी फोटो कि साथ छापने जा रही है ….

बहुत आसान है शनि देवता को खुश करना !

बहुत आसान है शनि देवता को खुश करना !
शनि देवता की बुरी दृष्टि से बचने का बहुत ही आसान उपाय है ….
बस आप हनुमान जी के पैर पकड़ लीजिये …
अर्थात हनुमान जी की पूजा कीजिये ….
क्योंकि हनुमान जी ने शनि देवता को रावण की कैद से छुड़ाया था ….
इस कारण हनुमान जी को वरदान मिला था कि जो कोई भी उनकी शरण मैं आएगा ….
शनि देवता कि बुरी दृष्टि उसपर नहीं पड़ेगी….

जय श्री राम…..
hanuman shani devta

पूजा ?

 

कुसुम ने सुबह उठते ही पूरे घर में शोर मचा रखा था की आज मंदिर में खास पूजा है ….
जल्दी करो अपने पति से बोली …मिस्टर कुसुम ! बोले अरे अभी तो अम्मा बाउजी को नाश्ता भी नहीं कराया तुमने …
तो क्या मैं इस ड्यूटी पर बैठी रहूं…एक दिन देर से नाश्ता कर लेंगे तो आसमान नहीं टूट पड़ेगा …कुसुम बोली

जल्दी जल्दी घर से बाहर की तरफ दौड़ते हुए बोली एक मिनट में आ जाओ में गाड़ी में बैठी हूँ ….
पतिदेव बड़बड़ाते हुए बाहर की तरफ दौड़े कि कहीं सुबह सुबह कलेश न हो जाये..

जैसा कि हमेशा होता है…मंदिर कि खास पूजा और देर न हो मुमकिन नहीं ….

बाकि कसर ट्रैफिक ने पूरी कर दी नतीजा दोपहर के १२ बज गए थे…
घर पहुंचे तो अम्मा बाउजी पानी और रात कि अपनी बची हुई रोटी का नाश्ता कर चुके थे …..
रसोई को लॉक जो था ….मैं गलती से चाबी रखना भूल गयी थी …कुसुम बोली
पतिदेव समझते सब थे लेकिन हिम्मत नहीं थी कुछ बोलने कि…

जितने लाचार अम्मा बाउजी लग रहे थे उतना ही लाचार वह खुद को महसूस कर रहा था …
क्या वाकही हम खास पूजा पर गए थे ?

old age couple

kaash !

स्कूटी तो दौड़ती ही है बस जल्दी का बहाना चाहिए चाहे १२ साल का हो चलाने वाला या ६० साल का….
पडोसी के बेटे को स्कूटी के साथ पुलिस ने थाने मैं पकड़ रखा था सो मैं भी शर्मा जी के साथ थाने पहुँच गया ….
दो घंटे की मशक्कत के बाद सरे लेक्चर सुनने के बाद आगे ऐसी गलती न करने का वडा और …जेब ढीली करने के बाद…
चेहरे पर किला फतह कर लेने का गर्व लिए हम तीनो घर पहुँच चुके थे…..

थाने की बातें थाने में ही छोड़कर ….जिंदगी फिर से पटरी पर आ चुकी थी जैसे की कुछ हुआ ही न हो ….
मुश्किल से १० दिन ही बीते थे की फिर से शर्मा जी का फ़ोन आ गया की थाने चलना है ….बेटा और स्कूटी …..

लेकिन इस बार थाने का माहौल कुछ और ही था ….खूब सारी भीड़ और बेटे के तो चोटों और खून से सने कपडे ….
पता चला की एक चार साल का बच्चा स्कूटी की चपेट में आ गया था और उसकी हालत नाजुक है …हॉस्पिटल में ….
न तो लाइसेंस न हेलमेट और न ही रोकटोक …नतीजा….चारों तरफ अंधकार दोष किसको दें ये तो बच्चा था…
मैंने उसको क्यों नहीं काबू में रखा..शर्मा जी बार बार बेबस से यही दोहराये जा रहे थे…दोनों परिवारों की जिंदगी दांव पर थी…
भगवान से दुआ करते करते सुबह के पांच बज चुके थे लेकिन मन के अंदर का अंधकार ख़तम नहीं हुआ था…
काश !

Lord Hanumanji Statue

ज़िंदगी ना मिलेगी दोबारा

सनडे का दिन था बेल बजी तो देखा रवि था मेरा मित्र
कई बार मुझसे कोई ना कोई मदद माँगने आ चुका था
उसके चेहरे से लगता था की वो कुछ परेशान है मैने सोचा
अगर पूछ लिया तो तो फिर कुछ ना कुछ मदद के लिए देना पड़ जाएगा

इधर उधर की बातों में आधा घंटा बीत चुका तो रवि बोला मैं चलता हूँ
मैने भी कहा अच्छा ठीक है मैने भी सोचा चलो आज बच गये
सुबह आफिस पहुँचा तो पता चला की रवि नहीं आया उसकी पत्नी रात से
हॉस्पिटल में अड्मिट थी

शाम को घर पहुँचा तो पता चला की अभी अभी उसकी पत्नी का
देहांत हो गया है सुबह संस्कार है मैं उसी समय हॉस्पिटल पहुँचा वो एक सरकारी हॉस्पिटल था
वहाँ पता चला की आर्थिक तंगी की वजह से वे प्राइवेट हॉस्पिटल में नहीं ले जा पाए
सरकारी अस्पतालों का हाल किसी से छुपा नहीं हैं

मैं समझ गया की कल रवि मेरे घर
क्यों आया था ओर मदद माँगने में संकोच कर रहा था .अब मुझे अपने आप पर लज्जा
आ रही थी की अगर मैं कुछ मदद कर देता तो शायद वो सही इलाज़ करवा पाता ओर
शायद वो जिंदा होती…

अगर मैं आपकी बेटी होती तो !

सदर बाज़ार जाने के लिए रिक्शा किया पहाड़ गंज से

अचानक नज़र पड़ी कि एक लड़की को बड़ी बेरहमी से दो लड़के चाकू मार मार कर अधमरा कर रहे हैं डर के मारे किसी की हिम्मत नहीं हो रही थी उसे रोकने की

दोनों लड़के चाकू लहराते बाइक पर भाग निकले सब तमाशा देखने लगे पता चला की दोनो लड़के लड़की का मोबाइल छीनकर भाग रहे थे तो लड़की ने विरोध किया तो उसका ये हाल कर गये

भीड़ बहुत हो गयी थी जाम ना लग जाए रिक्शा वाला भी तेज़ी से सदर की तरफ चल पड़ा.
आते हुए पता चला की पुलिस के आने से पहले ही लड़की ने दम तोड़ दिया था .

Accident, Bleed, Bleeding

इतना सुनते ही मुझे ना जाने क्या हो गया मेरी आँखों के सामने वो नज़ारा घूम गया , मुझे ऐसा लगा की वो लड़की मुझसे पूछ रही हो कि मेरी जगह आपकी बेटी होती तो भी क्या आप ऐसे ही निकल जाते इस बात को दो साल गुजर चुके हैं लेकिन इस सवाल का जवाब मुझसे बार बार पूछा जा रहा है ….ये तो मैं तय कर चुका हूँ की अब मैं ऐसे ही निकला नहीं करूँगा…